कह दे ज़रा ,ज़रा सा तो सही
अभी नहीं पर देर से ही सही
लफ्ज़ हो ऐसे की सुकून मिल जाए
तनहा उन रातों से बात हो जाए ||
अधूरी सी ख्वाबो में दिखती हो तुम
अब तो चाँद की भी आँखों में छुपती हो तुम||
कहना उस चाँद से कि तारे गिरा दे
पूरी कुछ मेरी अब ख्वाहिशें करा दे||
अरसो से तेरी आहटों का एक भी साया नहीं है
फिर क्यूँ आज भी ये सब पराया नहीं है
होती सामने तो ये सारी अजनबी बातें ना होती
क्यूंकि तुम्हारे चाँद को देखकर मेरी सारी ख्वाहिशे पूरी हो रही होती |||
अभी नहीं पर देर से ही सही
लफ्ज़ हो ऐसे की सुकून मिल जाए
तनहा उन रातों से बात हो जाए ||
अधूरी सी ख्वाबो में दिखती हो तुम
अब तो चाँद की भी आँखों में छुपती हो तुम||
कहना उस चाँद से कि तारे गिरा दे
पूरी कुछ मेरी अब ख्वाहिशें करा दे||
अरसो से तेरी आहटों का एक भी साया नहीं है
फिर क्यूँ आज भी ये सब पराया नहीं है
होती सामने तो ये सारी अजनबी बातें ना होती
क्यूंकि तुम्हारे चाँद को देखकर मेरी सारी ख्वाहिशे पूरी हो रही होती |||
nice one
ReplyDeletethankx..
ReplyDeletekya baat hai......... mere bhai tu hi hamre khandaan ka agla guljar.... :)
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