मेरे हारमोनियम क्लास के ना देख पाने वाले बच्चो के लिए
ना काले से बैर
ना सफ़ेद से प्रेम
सब रंग हैं जिनके लिए समान
वो नेत्रहीन जो
अपनी ओस को
हैं लिए चले कई मीलों पार
साहस तो है चट्टानों सा
बादल की गरज गिर जाने सा
ये छूकर सबका
दिल छू जाएँ
और मिल पृथ्वी पर स्वर्ग बनाये
ये छोटे से बालक...हैं खुद के चालक
ये नेत्रहीन नहीं बल्कि .... केवल भाग्यहीन है||
